Thursday, May 15, 2025

लखनऊ का इतिहास और संस्कृति

  

लखनऊ का इतिहास और संस्कृति: आपको यहाँ के ऐतिहासिक स्थल जैसे बड़ा इमामबाड़ा, छोटा इमामबाड़ा, रूमी दरवाज़ा कैसे लगे? क्या आपको यहाँ की तहज़ीब और अदब में कुछ ख़ास लगा?

लखनऊ के व्यंजन: क्या आपने यहाँ के मशहूर व्यंजन जैसे बिरयानी, कबाब, निहारी, या चाट का स्वाद चखा? आपका पसंदीदा कौन सा रहा? कोई ऐसी जगह जहाँ का खाना आपको बहुत पसंद आया?

लखनऊ की भाषा और बोली: आपको यहाँ के लोगों का बात करने का अंदाज़ कैसा लगा? क्या आपको "आप-जनाब" और "भईया" जैसे शब्दों में कुछ ख़ासियत दिखी?

लखनऊ के बाज़ार: आपने यहाँ के मशहूर बाज़ार जैसे अमीनाबाद, हज़रतगंज, चौक घूमे क्या? आपको वहाँ क्या ख़ास लगा? क्या आपने कुछ खरीदारी की?

लखनऊ के आसपास घूमने की जगहें: अगर आपको लखनऊ के आसपास घूमने में दिलचस्पी हो, तो हम उसके बारे में भी बात कर सकते हैं।  पुरानी मशहूर जगहों के अलावा, अब लखनऊ में घूमने और देखने के लिए बहुत कुछ नया और दिलचस्प जुड़ गया है।

पुरानी विरासत के साथ-साथ, लखनऊ अब एक आधुनिक शहर के रूप में भी विकसित हो रहा है, और यहाँ कई नए आकर्षण उभरे हैं, जैसे:

इकोना: यह एक विशाल आधुनिक शहरी केंद्र है, जिसमें शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स, होटल और व्यावसायिक स्थान हैं। यह खरीदारी, मनोरंजन और सामाजिक मेलजोल के लिए एक लोकप्रिय जगह बन गया है।

अटल बिहारी वाजपेयी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम (इकाना क्रिकेट स्टेडियम): क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह एक शानदार स्टेडियम है, जहाँ अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट मैच आयोजित होते हैं। इसकी आधुनिक वास्तुकला भी देखने लायक है।

लुलु मॉल, फीनिक्स पिलासियो मॉल, सहारा मॉल: यह भारत के सबसे बड़े शॉपिंग मॉल्स में से एक है। यहाँ आपको राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड्स, फूड कोर्ट, मल्टीप्लेक्स और एक विशाल मनोरंजन क्षेत्र मिलेगा। यह पूरे परिवार के लिए घूमने की एक बेहतरीन जगह है।

जनेश्वर मिश्र पार्क: यह एक विशाल और खूबसूरत इको-फ्रेंडली पार्क है। यहाँ जॉगिंग ट्रैक, साइकिल ट्रैक, नौका विहार, बच्चों के खेलने के क्षेत्र और विभिन्न प्रकार के हरे-भरे स्थान हैं। यह शहर के शोरगुल से दूर एक शांत जगह है।

साइंस सिटी: यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी में रुचि रखने वालों के लिए एक उत्कृष्ट स्थान है। यहाँ विभिन्न इंटरैक्टिव प्रदर्शनियाँ और गैलरी हैं जो विज्ञान को मनोरंजक तरीके से प्रस्तुत करती हैं।

अंबेडकर मेमोरियल पार्क: हालाँकि यह थोड़ा पुराना है, लेकिन इसकी भव्य वास्तुकला और विशालता इसे आज भी एक महत्वपूर्ण आकर्षण बनाती है। यह सामाजिक न्याय और समानता के मूल्यों को समर्पित है।

नाइटलाइफ़: लखनऊ में अब धीरे-धीरे नाइटलाइफ़ भी विकसित हो रही है, जिसमें कुछ अच्छे रेस्टोरेंट, लाउंज और कैफ़े शामिल हैं जो देर रात तक खुले रहते हैं।

इन नई जगहों के अलावा, लखनऊ में कई आधुनिक रेस्टोरेंट, कैफ़े और आर्ट गैलरी भी खुल गए हैं जो शहर की संस्कृति और जीवनशैली में एक नया रंग भर रहे हैं।

 

तो हाँ, लखनऊ अब सिर्फ अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए ही नहीं, बल्कि आधुनिक आकर्षणों के लिए भी जाना जाता है।

हाँ, लखनऊ की ये चीजें भी अपनी एक खास पहचान रखती हैं! चलिए, इनका वर्णन करते हैं:

लखनऊ की रेवड़ी और गजक:

लखनऊ की रेवड़ी और गजक सर्दियों के मौसम में खूब पसंद की जाती हैं, लेकिन इनकी मिठास साल भर मिलती है।

रेवड़ी: यह तिल और चीनी से बनी एक कुरकुरी मिठाई है। छोटी-छोटी, गोल आकार की ये रेवड़ियां मुंह में घुल जाती हैं और तिल का सौंधापन बहुत अच्छा लगता है। लखनऊ में आपको सादी रेवड़ी के साथ-साथ खोया और अन्य स्वादों वाली रेवड़ी भी मिल जाएगी। इनकी खासियत है कि ये ताज़ी और कुरकुरी होती हैं।

गजक: यह भी तिल और चीनी से बनती है, लेकिन इसकी बनावट थोड़ी अलग होती है। यह आमतौर पर चपटी और थोड़ी सख्त होती है। गजक में कभी-कभी मूंगफली और सूखे मेवे भी डाले जाते हैं, जिससे इसका स्वाद और बढ़ जाता है। लखनऊ की गजक अपनी शुद्धता और पारंपरिक स्वाद के लिए जानी जाती है।

आपको ये दोनों मिठाइयाँ लखनऊ के पुराने बाज़ारों और मिठाई की दुकानों पर आसानी से मिल जाएंगी।

लखनऊ की कुल्फी:

लखनऊ की कुल्फी गर्मी के मौसम में राहत देने वाली एक लाजवाब मिठाई है। यहाँ आपको पारंपरिक स्वाद वाली मलाई कुल्फी के साथ-साथ कई नए और दिलचस्प फ्लेवर भी मिलेंगे।

मलाई कुल्फी: यह सबसे पारंपरिक और लोकप्रिय कुल्फी है, जो गाढ़े दूध, खोया और मेवों से बनती है। इसका क्रीमी टेक्सचर और इलायची का स्वाद इसे खास बनाता है।

विभिन्न फ्लेवर: अब आपको लखनऊ में केसर पिस्ता, आम, चॉकलेट, पान और कई अन्य आधुनिक स्वादों वाली कुल्फी भी मिल जाएगी।

मशहूर जगहें: अमीनाबाद और चौक जैसे पुराने इलाकों में आपको कई ऐसी दुकानें मिल जाएंगी जो सालों से स्वादिष्ट कुल्फी बेच रही हैं।

लखनऊ की कुल्फी का मजा, खासकर गर्मी की शामों में, कुछ और ही होता है।

लखनऊ का गड़बड़झाला बाज़ार:

गड़बड़झाला बाज़ार लखनऊ का एक बहुत ही मशहूर और जीवंत बाज़ार है। यह अमीनाबाद इलाके में स्थित है और अपनी विविधता के लिए जाना जाता है।

विविधता: इस बाज़ार में आपको लगभग हर तरह का सामान मिल जाएगा - कपड़े, जूते, इलेक्ट्रॉनिक सामान, घरेलू उपकरण, स्टेशनरी, खिलौने और भी बहुत कुछ। इसीलिए इसे "गड़बड़झाला" कहते हैं, क्योंकि यहाँ सब कुछ एक साथ मिलता है।

किफायती: यह बाज़ार अपनी किफायती कीमतों के लिए भी जाना जाता है। यहाँ आपको अच्छी गुणवत्ता वाला सामान reasonable दामों पर मिल सकता है।

स्थानीय अनुभव: गड़बड़झाला बाज़ार में घूमना एक अनोखा अनुभव होता है। यहाँ आपको लखनऊ के स्थानीय लोगों की जीवनशैली और खरीदारी की आदतों को करीब से देखने का मौका मिलता है। यहाँ हमेशा भीड़-भाड़ रहती है और सौदेबाजी का माहौल भी खूब देखने को मिलता है।

अगर आपको लखनऊ की स्थानीय खरीदारी का अनुभव लेना है, तो गड़बड़झाला बाज़ार ज़रूर घूमना चाहिए।

लखनऊ का बुक मार्केट (रविवार की किताब मंडी):

लखनऊ में किताबों के शौकीनों के लिए रविवार की किताब मंडी एक खास जगह है। यह अमीनाबाद के पास नाज़ सिनेमा रोड पर लगती है।

पुरानी और दुर्लभ किताबें: इस मंडी में आपको पुरानी और दुर्लभ किताबें भी मिल सकती हैं, जिन्हें ढूंढना आम दुकानों पर मुश्किल होता है।

किफायती दाम: यहाँ किताबें बहुत ही किफायती दामों पर मिलती हैं, खासकर पुरानी किताबें। छात्रों और पढ़ने के शौकीन लोगों के लिए यह एक खजाने की तरह है।

विविध संग्रह: आपको यहाँ हर तरह की किताबें मिल जाएंगी - साहित्य, उपन्यास, इतिहास, विज्ञान, कला और प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित किताबें भी।

सौदेबाजी: यहाँ भी सौदेबाजी चलती है, इसलिए आप अपनी पसंद की किताबें और भी कम दाम में खरीद सकते हैं।

माहौल: रविवार की सुबह इस मंडी में किताबों के प्रेमियों की भीड़ देखने लायक होती है। यह एक ऐसा माहौल होता है जहाँ आप समान विचारधारा वाले लोगों से मिल सकते हैं और किताबों पर चर्चा कर सकते हैं।

अगर आप किताबें पढ़ने के शौकीन हैं, तो रविवार की किताब मंडी आपके लिए एक बेहतरीन जगह है।

 

ये सभी जगहें लखनऊ की संस्कृति और जीवनशैली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अगली बार जब आप लखनऊ आएं, तो इन जगहों का अनुभव ज़रूर लीजिएगा!

Saturday, August 12, 2023

Comedian Mahmood Singing and Dancing Special Song


बहुत कम लोग जानते हैं कि किशोर कुमार और महमूद महान कलाकार, सिंगर, एक्टर, प्रोडूसर और डायरेक्टर थे. महमूद ट्रेंड डांसर भी थे.

Thursday, February 2, 2023

New Delhi World Book Fair 25 Feb to 5 March 2023 from 11 am to 8 pm


New Delhi World Book Fair 25 Feb to 5 March 2023 from 11 am to 8 pm
you will not find these books at there. Purchase these books at Amazon.in

Sunday, November 6, 2022

हँसी गुदगुदी वाला राजेन्द्र पंडित Laughing poet Rajendra Pandit


हँसी गुदगुदी  वाला  राजेन्द्र पंडित Laughing poet Rajendra Pandit

Monday, October 10, 2022

Train chalti ja rahi hai truth of life by Rajendra Pandit poet राजेन्द्र...


ट्रेन चलती जा रही है ट्रेन चलती जा रही है 

जा रहा कोई ह्रदय में प्रिय मिलन की आस लेकर
और कोई जा रहा है सिन्धु सा संत्रास देकर
बेखबर वह विरह स्वर को मिलन धुन में गा रही है 
ट्रेन चलती जा रही है ट्रेन चलती जा रही है 

मिल गयी जिसको जगह बेफिक्र हो वह सो रहा है 
किन्तु जो पाया नहीं वह व्यवस्था को रो रहा है
हैं बहुत अवरोध लेकिन लक्ष्य तक पंहुचा रही है
ट्रेन चलती जा रही है ट्रेन चलती जा रही है 

वह नहीं टिकता यहाँ पर आ गया जिसका ठिकाना
एक शाश्वत सत्य जो आया उसे पड़ता है जाना
सृष्टि के इस नियम को यह बिन कहे समझा रही है
ट्रेन चलती जा रही है ट्रेन चलती जा रही है 

- Rajendra Pandit

train chalti ja rahi hai train chalti ja rahi hai

ja raha koi hriday me priy milan ki aas lekar
aur koi ja rahaa hai sindhu sa santras dekar
bekhabar vah virah swar ko milan dhun me ga rahi hai
train chalti ja rahi hai train chalti ja rahi hai

mil gayi jisko jagah befikr ho vah so rahaa hai
kintu jo paya nahin vah vyavastha ko ro rahaa hai
hain bahut avrodh lekin lakshy tak panhucha rahi hai
train chalti ja rahi hai train chalti ja rahi hai

vah nahin tikta yahaan par aa gayaa jiska thikana
ek shashwat saty jo aaya use padta hai jaana
srishti ke is niyam ko yah bin kahe samjhaa rahi hai
train chalti ja rahi hai train chalti ja rahi hai
- Rajendra Pandit

Tuesday, August 30, 2022

আধা হাই চন্দ্রমা রাত আধী aadha hai chandrama raat aadhi lyrics in Bengali

 আধা হাই চন্দ্রমা রাত আধী aadha hai chandrama raat aadhi lyrics in Bengali

film Navrang 1959  Singer Mahendra Kapoor, Aasha Bhonsle


আধা হাই চন্দ্রমা রাত আধী-2

রহ ন জায়ে তেরী মেরী বাত আধী, মুলাকাত আধী

আধা হাই চন্দ্রমা

 

পিয়া আধী হাই পয়ার কী ভাশা,

আধী রহনে দো মন কী অভিলাশা

আধে ছলকে নয়ন আধে ধলকে নয়ন,

আধী পলকোন মে ভী হাই বরসাত আধী

আধা হাই চন্দ্রমা

 

আস কব তক রহেগী অধুরী,

প্যাস হোগী নহী কয়া যে পুরী

পয়াসা পয়াসা পবন পয়াসা পয়াসা গগন

প্যাসে তারণ কী ভী হাই বারাত আধী

আধা হাই চন্দ্রমা

 

সুর আধা হি শ্যাম নে সাধা,

রহা রাধা কা পয়ার ভী আধা-2

নেন আধে খিলে হন্থ আধে হিলে,

রহী মন মে মিলন কী ভো বাত আধী

আধা হাই চন্দ্রমা